पोवारी भाषा प्रोफाइल मा,
पोवारी साहित्य को अद्भुत नजारा से।
कि बांचकर गंगा घोड़ा नाहाय जासेती।
देखकर डोरा का पारना फिट जासेती।।
यहा सुंदर अलंकारों प्रयोग से।
यहां मातृभाषा पोवारी को श्रृंगार से।
कि बांचकर गंगा घोड़ा नाहाय जासेती।
देखकर डोरा का पारना फिट जासेती।।
यहां कल्पनाओं की उड़ान से।
यहां भावों को उतार चढ़ाव से।
कि बांचकर गंगा घोड़ा नाहाय जासेती।
देखकर डोरा का पारना फिट जासेती।।
यहां नाविन्यपूर्ण विचार सेती।
यहां समस्या व समाधान सेती।
कि बांचकर गंगा घोड़ा नाहाय जासेती।
देखकर डोरा का पारना फिट जासेती।।
यहां मनोहारी बिंबों को प्रयोग से।
यहां निसर्ग को अप्रतिम वर्णन से।
कि बांचकर गंगा घोड़ा नाहाय जासेती।
देखकर डोरा का पारना फिट जासेती।।
यहां साहित्य मा कहावत सेती।
यहां साहित्य मा सिद्धांत सेती।
कि बांचकर गंगा घोड़ा नाहाय जासेती।
देखकर डोरा का पारना फिट जासेती।।
बांचकर मन ला संतुष्टि मिल जासे।
देखकर डोरा आश्चर्यचकित होय जासेती।
कि बांचकर गंगा घोड़ा नाहाय जासेती।
देखकर डोरा का पारना फिट जासेती।।
-ओ सी पटले