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माँ की ममता

Poonam milap bansal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माँ की ममता नाव सी…
        
                                                    
                            
कभी धूप सी कभी छाँव सी
वीराने में गाँव सी…
एक मात्र ठाँव सी…

गहरे घाव में मरहम सी
गानो में वो सरगम सी
रिस्तो में वो अर्गम सी…

पंछी की उड़ान सी
और पक्के मकान सी
सलीके में रकान सी…

समुंदर में गोती सी
सीपियों में मोती सी…
दियो में वो ज्योति सी
तारों में वो चंद्रमा
प्रथ्वी की वो परिक्रमा…

संसार में वो रंग है
जीवन में तरंग है…

ध्वनी में सारंगी सी
फलो में नारंगी सी…

सुरो में वो ताल है
जिंदगी का हाल है…

जीवन का वो मल्हार है
उस बिन जीवन बेकार है…

व्यर्थ है,अनर्थ है
बिन माँ के सब गर्त है…

वो ही जीवन की पर्त है
आदि से अनंत तक
प्रथ्वी के अन्त तक
वो ही एकमात्र आधार है
संसार की कर्णधार है ।
- पूनम बंसल 
एक वर्ष पहले
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