बहुत सा इश्क थोड़ी सी नफरत
न जाने कियों तुमसे हो गई है
ज़रा ज़रा सी करें हम शिकायत
तो तारीफें भी तुमसे से ही कही है
बहुत सा इश्क थोड़ी सी नफरत
न जाने कियों तुमसे हो गई है
कभी जो रूठो जो तारा बन कर
शिकायते फिर चाँद से ही हुई है
सुबह कहे दिल भुला दूँ तुमको
पर शाम आते लगे सब सही है
बहुत सा इश्क थोड़ी सी नफरत
न जाने कियों तुमसे हो गई है
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