हिंदी — मेरा मान, मेरा अभिमान
हिंदी में सजी है बिंदी,
नारी के माथे का गहना है,
अपनी भाषा का मान रखो,
यह भारत का सच्चा गहना है।
संस्कृत की प्यारी-सी बेटी,
जन-जन की आवाज़ बनी,
माँ की ममता-सी मधुर है,
हिंदी मेरी पहचान बनी।
इसके अक्षर-अक्षर में देखो,
माटी की खुशबू आती है,
सदियों से यह संस्कारों की
पावन गंगा बहाती है।
माँ की ममता जैसा स्नेह लिए,
हर मन को राह दिखाती है,
अंधियारे में दीप जलाकर,
जीवन जीना सिखाती है।
अपनी इस अनमोल धरोहर को
यूँ ही कभी न मिटने देना,
हिंदी के गौरव की लौ को
मन में सदा जलाए रखना।
हिंदी केवल भाषा नहीं है,
यह संस्कृति, संस्कार है,
माटी से जुड़ी हमारी
पीढ़ियों का आधार है।
आओ, इसका मान बढ़ाएँ,
इसका गौरव गाएँ हम,
हिंदी को अपना गर्व बनाएँ,
हिंदी पर अभिमान करें हम।
माँ-सी प्यारी, माटी-सी न्यारी,
हिंदी मेरी शान है,
मेरे देश की, मेरे मन की
हिंदी ही पहचान है।