अंतस मन की दृष्टि से फुटता है जब सपनों का यवन
तब मन तलाशता है भावनाओ का दर्पण
देखता है इस संसार में कही मित्र कही दुश्मन
कभी आहत हो तो कही पाता प्रसन्नता का आँगन
सहज़ नहीं सरल नहीं की करें एक सिद्धांत का अनुसरण
अनेक इक्षाएं असीमित अपेक्षाएं
इसलिए एक जीवन में अनेक भावनाएं का हो समागम