जनरल रावत, हिंद सेनापति
रिपु मर्दक, विलक्षण महारथी
सदा संगिनी और वीर साथी
अचानक यूं ही कैसे चले गए
वह नर नाहर जो कभी डरा नहीं
उत्तरदायित्व निभाने में रूका नहीं
अपेक्षाओं के बोझ तले दबा नहीं
नूतन राही, पुरानी राह चला नहीं
बैरी को बारंबार धूल चटाई थी
चाहे डोकलाम हो या गलवान
या जाना हो म्यांमार सीमापार
सर्जिकल स्ट्राइक या बालाकोट
ये दारुण दुख क्यों दिया तुमने
छीना भारत का अवलंब तुमने
इस रहस्य पर पड़े ये पर्दे खोलो
हे राम, तुम अब तो कुछ बोलो
क्या कोई नियोजित षड़यंत्र था
पराभूत का छिपाया खंजर था
जिसने राष्ट्र का सीना चीरा था
हे राम, तुम अब तो राज खोलो
विदीर्ण हमारा तन और मन है
राष्ट्र शोकमग्न और हत भग्न है
संतप्त परिवारों को संबल दो
हमें आश्वस्त व पथ प्रदर्श करो...