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चिंतन ख़ुशी

pavan sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काश इस मौसम में आग लग जाए
        
                                                    
                            
बहाना गर्मी का हो और खुशी मिल जाए
कब तक करते रहेंगे इंतजार इस सर्दी का
अभी गई भी नहीं और फिर मिल जाए
तुम्हारा एहसास सुबह की हवा की तरह है
जो दिखती भी नहीं और दीदार हो जाए
तुम हमारे हो ना हो पर थोड़ा यक़ीन हो जाए
एक बार मिलकर तो देखो शायद प्रेम हो जाए
मैंने खुशियों को कई बार आते जाते देखा है
हवा को ख़ुशी से बातें करते पहली बार देखा जाए
सब उसूल मालुम हैं दुनियां के यहां चाहत कहां
ख़ुशी से जाएगी तू एक दिन वहां, जहां हम कहां
यक़ीन ए मोहब्बत के दुश्मन यक़ीन 'ए हवा'
ऐसा चाहने वाला तुझे अगली सर्दी मिले ना मिले,,
2 वर्ष पहले
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samarth dalela

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