विज्ञापन

एहसास ए खुशी

pavan sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो हवा के जवाब सिर उठा के देती है
        
                                                    
                            
अगर समझा के पूछोगे तो मुस्करा देती है
बदल गया मौसम भी समझाते हुए उसको
क्या समझे नहीं? ज्यादा उलझे तो कह देती है
आज तो उसने हद करदी सपनों में लिया हाल चाल
मेरी बारी पर कहने लगी जागजाओ बताती हूं
उसकी अदाओं का जलवा है सदा मुस्कराकर निकलना है
बताओ सपने तो सलाह देती है सोचते होगे
हसरतें हैं क्या ? दिल में खुलके कह नहीं पाता
ख़ुशी की इन नादानी को ये हवाएं खूब समझती हैं
मुझे नहीं मालूम ये पागलपन कहां तक जाना है ?
बस जहां तक जाना है वहां पहुंच जाए "ऐ हवा"?
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

samarth dalela

2 कविताएं

View Profile