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प्रेम

pavan sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्नेह प्रेम वात्सल्य सी तुम,
        
                                                    
                            
जाने क्यों कैसे भा रही हो?
जाना ही था तो चली जाती,
जबरन तो नफ़रत भी नहीं होती।
2 वर्ष पहले
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