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सबक इश्क़ का

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सबक इश्क का हमको भी तुम सिखा दो
        
                                                    
                            
बिगाड़े हैं जो रिश्ते उनको बना दो

चलो सौंपते डोर हम अपनी तुमको
जुबाँ से अभी आज उल्फ़त जता दो

मोहब्बत रहेगी हमेशा ही तुमसे
बुझी चाहतों की शमा फिर जला दो

मिले राह में ख़ार ही ख़ार हमको
मिरी राहों में अब तो तुम गुल बिछा दो

सदा मुश्किलें झेली हमने अकेले
कभी दिल से तुम भी हमें हौसला दो

न इक दूजे बिन है गुज़ारा हमारा
चलो बीती बातों पे मिट्टी गिरा दो

ग़लत-फ़हमी आए नहीं बीच अपने
गिले शिकवे भी आज सारे मिटा दो
एक महीने पहले
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Manju Sharma

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