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प्रेम वो एहसास है

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दूर होकर होता जो महसूस, अपने पास है
        
                                                    
                            
धूप में भी छाँव का हो, प्रेम वो एहसास है

जिस्म दो हो, जिंदगी भर जान इक रहते है जो
ईश्वर ने ही बनाया, रिश्ता ये कुछ ख़ास है

मुतमइन होता नहीं दिल दीद से जिसकी कभी
बढ़ती जाती उम्र के ही साथ दिल की प्यास है

मन के मंदिर में, समाई रहती है मूरत सदा
ज़िंदगी इक दूजे बिन, उनको न आती रास है

रहते वाबस्ता हैं दिल के तार भी 'पारुल' सदा
पास हो कि दूर, रहता दिल में तो विश्वास है
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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