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मंज़िल की तू धुन ले

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने ख़्वाबों का ये ताना-बाना मेहनत से तू बुन ले
        
                                                    
                            
रास्ते मंजिल की जानिब तुमको ले जाएँ वो चुन ले

खून से ख़्वाबों के तूने ज़िन्दगी को क्यूँ रंगा है
अपनी मेहनत से तू अब ये ज़िन्दगी कर फाल्गुन ले

है लियाकत तुझमें ख़्वाबों को मुकम्मल कर ने की भी
करके हिम्मत अपने ख़्वाबों को तू फिर से अब भी बुन ले

तेरे अंतर्मन में ही बसते सफ़लता के सभी राज़
क्यूँ भटकता इस तरह तू, रूह की आवाज़ सुन ले

ज़िन्दगी की राहों पर रहबर नहीं मिलता है 'पारुल'
अपना रहबर बन के ख़ुद ही अपनी मंज़िल की तू धुन ले
2 घंटे पहले
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Chandra prakash

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