ज़िंदा हूँ जब तक मैं दिल में ममता की ललक रहेगी
माँ के प्यार की शुआओं से ज़िंदगी में धनक रहेगी
कच्ची मिट्टी को ढाल कर दिया है माँ ने हमें ये वजूद
मेरे जिस्म के कतरे-कतरे में माँ की ही महक रहेगी
माँ की परछाईं ही तो हूँ मैं ध्यान से देखे अगर कोई
मेरे चेहरे में मेरी माँ के चेहरे की ही तो झलक रहेगी
जिस माँ की कोख में धड़का था पहली बार मेरा दिल
उससे बिछड़ने की दिल में हमेशा ही कसक रहेगी
हर जन्म में वही माँ वहीं गोद चाहती है ये 'पारुल'
जबतक चलेगा जीवन-चक्र ये इच्छा तब तलक रहेगी