विज्ञापन

ममता की ललक

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िंदा हूँ जब तक मैं दिल में  ममता की ललक रहेगी
        
                                                    
                            
माँ के प्यार की  शुआओं से  ज़िंदगी में  धनक रहेगी

कच्ची मिट्टी को ढाल कर दिया है माँ ने हमें ये वजूद
मेरे जिस्म के  कतरे-कतरे में माँ की ही  महक रहेगी

माँ की परछाईं ही तो हूँ मैं ध्यान से देखे अगर कोई
मेरे चेहरे में मेरी माँ के चेहरे की ही तो झलक रहेगी

जिस माँ की कोख में धड़का था पहली बार मेरा दिल
उससे  बिछड़ने  की दिल में  हमेशा ही  कसक रहेगी

हर जन्म  में वही माँ  वहीं गोद  चाहती है ये  'पारुल'
जबतक चलेगा जीवन-चक्र ये इच्छा तब तलक रहेगी
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

Nema Ram

141 कविताएं

View Profile