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ख़्वाब आँखों में पलता है

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिन रात ख़्वाब इक मेरी आँखों में पलता है
        
                                                    
                            
सरकारी नौकरी के लिए दिल भटकता है

मेहनत के बाद भी मिले हैं सिर्फ ताने ही
अश्क़ों से मेरे, दिल नहीं कोई पिघलता है

कोशिश की है अगर तो मिली जीत है सदा
दिल इसलिए सदा मेरा कोशिश तो करता है

क्यूँ लोग सिर्फ हौसला मेरा  गिराते हैं
सूरज भी रोज़ ढल के सुबह तो निकलता है

सरकारी नौकरी पा के इक दिन दिखाऊँगा
भट्टी में तपता सोना तभी तो निखरता है

गर वालिदैन साथ हैं तो डर न कोई है
जो साथ वो हैं दिल नहीं तूफाँ से डरता है
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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