दिन रात ख़्वाब इक मेरी आँखों में पलता है
सरकारी नौकरी के लिए दिल भटकता है
मेहनत के बाद भी मिले हैं सिर्फ ताने ही
अश्क़ों से मेरे, दिल नहीं कोई पिघलता है
कोशिश की है अगर तो मिली जीत है सदा
दिल इसलिए सदा मेरा कोशिश तो करता है
क्यूँ लोग सिर्फ हौसला मेरा गिराते हैं
सूरज भी रोज़ ढल के सुबह तो निकलता है
सरकारी नौकरी पा के इक दिन दिखाऊँगा
भट्टी में तपता सोना तभी तो निखरता है
गर वालिदैन साथ हैं तो डर न कोई है
जो साथ वो हैं दिल नहीं तूफाँ से डरता है
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