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कहा अपना था जिनको

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहा अपना था जिनको ज़िंदगी से दूर हैं अब
        
                                                    
                            
मोहब्बत करके देखो हम हुए मजबूर हैं अब

बिछड़ कर हमसे उनका भी नहीं दिल लगता होगा
मगर रहते वो अपनी ही अना में चूर हैं अब

यकीं वादों पे उनके करते थे हम तो हमेशा
जफ़ाएँ ज़िंदगी का हो गई दस्तूर हैं अब

नहीं है अहमियत भी वादों की अब ज़िंदगी में
ये वादे तोड़ने वाले हुए मशहूर हैं अब

नही कोई शिकायत तुझसे है मेरे ख़ुदा भी
तेरा हर फ़ैसला 'पारुल' को भी मंज़ूर है अब
3 महीने पहले
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