कहा अपना था जिनको ज़िंदगी से दूर हैं अब
मोहब्बत करके देखो हम हुए मजबूर हैं अब
बिछड़ कर हमसे उनका भी नहीं दिल लगता होगा
मगर रहते वो अपनी ही अना में चूर हैं अब
यकीं वादों पे उनके करते थे हम तो हमेशा
जफ़ाएँ ज़िंदगी का हो गई दस्तूर हैं अब
नहीं है अहमियत भी वादों की अब ज़िंदगी में
ये वादे तोड़ने वाले हुए मशहूर हैं अब
नही कोई शिकायत तुझसे है मेरे ख़ुदा भी
तेरा हर फ़ैसला 'पारुल' को भी मंज़ूर है अब
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