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आईना तो ……

pankhuri singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आईना तू बड़ा इतराता है
        
                                                    
                            
तुझे सब नादां समझते हैं
गर तेरे पास भी दिल होता
तो पूछते तुझसे
क्या तब भी तू ऐसे ही करता??
मूक बन सब बातें सुनता
संग हंसता संग रोता
मन के भीतर के भावों को समझ न पाता
बातें सुन आईना मुस्कुराया
गर ऐसा होता तो मैं आईना न कहलाता
आईना तो बिल्कुल सच कहता है
जो देखता है वहीं दिखलाता है
भला उसके पास दिल कहां होता है
गर होता तो वो भी इंसा सा होता
भावों को अक्स में न उतरने देता
बस झूठे मुखौटे में सब छुपा लेता
आईने को बस आईना ही रहने दो
एक वही तो है जो कोई आंकलन नहीं करता
बस बाहरी अक्स को ही सच समझ बैठता है
और मूक बन सब देखता रहता है
आईना तो ……............
स्वरचित -सरिता सिंह
एक दिन पहले
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