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आईना एक तू ही.....

pankhuri singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आईना एक तू ही है
        
                                                    
                            
जो मुझे मूक बन सुनता रहता है
मन की सारी बातें तुझ से साझा कर लेती हूं
और तू मेरा कोई आंकलन नहीं करता
कभी कभी कोई बस केवल सुनने वाला चाहिए
मन हल्का हो जाता है
वरना बात केवल एक होती है
दस सुनने को मिल जाती है
 -सरिता सिंह
2 महीने पहले
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