विज्ञापन

"एक अनलिखी कथा"

Pankaj Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चाहा था
        
                                                    
                            
कभी कोई ऐसी कथा जन्म ले,
जिसमें स्मृतियों की परिचित छाया न हो,
न मेरा स्वर
किसी पंक्ति के पीछे सुनाई दे,
न किसी और की उपस्थिति
शब्दों के बीच धड़कती रहे।

एक ऐसा विस्तार,
जहाँ भाव हों
पर उनके साथ कोई चेहरा न जुड़ा हो।
जहाँ विरह भी
किसी नाम का आश्रित न बने,
और प्रेम
अपनी समस्त पहचानें त्यागकर
केवल अनुभूति रह जाए।

क्योंकि हर कहानी में
अनजाने ही
हम अपने टूटे हुए अंश रख देते हैं।
कभी किसी संवाद में,
कभी किसी मौन में,
कभी किसी अधूरी प्रतीक्षा में।
और फिर
कथा समाप्त होने पर भी
हम उससे बाहर नहीं निकल पाते।

मैं चाहता था
एक ऐसी रचना
जो किसी जीवन का प्रतिबिंब न हो—
न मेरी व्यथाओं का,
न किसी और की स्मृतियों का।
केवल समय की तरह निर्लिप्त,
आकाश की तरह अनाम,
और नदी की तरह
निरंतर बहती हुई।

पर अंततः जाना—
मनुष्य
अपने भीतर से बाहर लिख नहीं सकता।
हर शब्द में
उसकी कोई छिपी हुई साँस होती है,
हर कथा में
उसका कोई अनकहा अकेलापन।
और शायद
इसीलिए कोई भी कहानी
पूरी तरह किसी से रिक्त नहीं होती।
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all