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जिंदगी में उलझन

pankaj Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिंदगी
        
                                                    
                            
सुलझाने से नहीं सुलझ रहे मसले मेरे
खुद उलझनों में उलझ रहा हूँ
क्या ही सुलझाऊँ पाऊँगा मेरे अपनों के मसले
मैं खुद ही सुलझा नहीं पा रहा अपने मसले
लोग कह रहे है कि तू बदल रहा हूँ
कोई बताए इन्हे की मैं खुद ही आग में जल रहा हूँ
फिर भी कह रहे की मैं बदल रहा हूँ
कितनी अजीब है तू ज़िंदगी
मैं जितना सँवारता हूँ तू उतना बिखैर देती है
 
5 घंटे पहले
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