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जिंदगी में उलझन

                
                                                         
                            जिंदगी
                                                                 
                            
सुलझाने से नहीं सुलझ रहे मसले मेरे
खुद उलझनों में उलझ रहा हूँ
क्या ही सुलझाऊँ पाऊँगा मेरे अपनों के मसले
मैं खुद ही सुलझा नहीं पा रहा अपने मसले
लोग कह रहे है कि तू बदल रहा हूँ
कोई बताए इन्हे की मैं खुद ही आग में जल रहा हूँ
फिर भी कह रहे की मैं बदल रहा हूँ
कितनी अजीब है तू ज़िंदगी
मैं जितना सँवारता हूँ तू उतना बिखैर देती है
 
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5 घंटे पहले

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