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पहचान करते करते भूल भुलैया में खो गया।

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            निकले थे जब हम सफर पर,
        
                                                    
                            
तो सफ़रनामा सुनाना ही भारी पड़ गया।
कहां से लेकर कहां तक सुनाएँ?
हर सड़क हर गली और रास्ता बदल गया।
क्या क्या सुनाएं हर जगह की ?
पूरा का पूरा नक्शा ही बदल गया।
खड़ा रह गया चकाचौंध देखकर,
अता पता पूछ पूछकर दिमाग चकरा गया।
जिन रास्तों का पहले पता था,
पहचान करते करते भूल भुलैया में खो गया।
सीधा सादा मैं निकला घर से,
मिला कुछ नहीं सैर करके घर वापिस आ गया।
-चंद्र दत्त शर्मा
2 सप्ताह पहले
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