विज्ञापन

निगाहों में जो बस गई

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            निगाहों में जो बस गई,
        
                                                    
                            
उसे उजागर करूं कैसे?
मत पूछो मेरे दिल की,
इसको दिलासा दूं कैसे?
समझूं तो समझने ना दे,
इसे बहलाऊं तो कैसे?
बात बनती है बनने दे,
अपना बनाऊं तो कैसे?
-चंद्र दत्त शर्मा
3 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

387 कविताएं

View Profile

SHASHANK SRIVASTAVA

7 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10067 कविताएं

View Profile