ना समझ ना समझें,
हर रिश्ता बेमिसाल।
किस किसको समझाए?
यह उलझा हुआ सवाल।
रिश्ते की अहमियत तब तक,
जब तक रहे मुट्ठी में माल।
यदि खाली हो गई मुट्ठी,
तो ना पूछे कोई हाल।
-चंद्र दत्त शर्मा