लिखा है जो भाग्य में,
वही होकर रहता है,
जो रास्ता बना लिया,
नीर वही होकर बहता है।
सुख दुख भी तो,
जीवन के दो पहलू हैं,
जिसने जैसा कर्म किया,
वैसा ही फल मिलता है।
-चंद्र दत्त शर्मा