जब बुरा वक्त आता है,
तो सबको आजमाकर देख लिया,
मैने अपनों को ही पराए होते देखा है।
जिन पर मुझे गर्व था,
उन्होंने मेरे प्रति कोई तरजीह नहीं दी,
मैने उनको करीब से देखा है।
जब कोई नाकाम होता है,
तो पूछने वाला कोई नहीं होता,
मैने अपनी बेबसी को स्वयं देखा है।
मुंह पर कछ और, पीछे कुछ और,
अपनों के बदलते चेहरों को मैने देखा है।
-चंद्र दत्त शर्मा