एक ही धुन सवार है,
बस कुर्सी पर वार है।
हमारी हो जाए बस,
अब आर है या पार है।
हर तरीके अपना रहे,
अब जीत है या हार है।
जनता का भला ना दीखे,
ये कैसा पलटवार है?
-चंद्र दत्त शर्मा