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बंधन में तो बंध गए हम

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बंधन में तो बंध गए हम,
        
                                                    
                            
पर दूसरा समझे जब।
कुछ दिन चला...,
जीवन का सिलसिला,
पता नहीं विश्वास में...,
विश्वासघात किया कब?
बेशक पास पास हैं हम,
दूरियां तो बढ़ ही गईं,
जिंदगी ऐसे ही चलेगी अब।
-चंद्र दत्त शर्मा
3 महीने पहले
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