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अब आ गई मेरी बारी

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस दिन तो कर ली तुमने अपनी मनमानी,
        
                                                    
                            
रात गई, भोर हुआ, अब आ गई मेरी बारी।
सब दिन न हों एक समान, यह बात जानी,
पता नहीं... कब किसका हो पलड़ा भारी?
-चंद्र दत्त शर्मा
7 घंटे पहले
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