विज्ञापन

चलो, फिर नई शुरुआत करते हैं

Pandey Akshay

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            टूट या बिछड़ जाने का अर्थ, अंत नहीं होता
        
                                                    
                            
हर टूटी हुई चीज़ सवर जाती गर, कला आ जाए ,
जैसे टूटे हुए पत्ते मिट्टी बन दूसरों को जीवन देते हैं
टूटे हीरे ही कोहिनूर बनते है...

मोल सोने का भी घट जाए अगर वो टूटे ना
आभूषण भी तो टूट के बने हैं

ठीक वैसे ही बिछड़े हुए पल, याद बनते हैं
ठोकर खाकर ही समझदार बनते है
फिर कैसी शिकायत कौन सी नाराजगी
चलो , हम फिर से नई शुरुआत करते हैं.......
9 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all