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शोभाग्य पर्व तीज

Pallavi Dwivedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हरियाली की छाया में, आई तीज की रात,
        
                                                    
                            
सज-धज कर आईं बहनें, लहराया सौगात।
मेंहदी रचे हाथों में, सजी चूड़ियों की बात,
झूलों पर झूलती नारी, हर दिल है कायनात।

हरियाली लहराए, झूले पड़ें पेड़ों पर,
सावन की फुहारों संग, तीज आई घर-घर।
व्रत रखा है श्रद्धा से, सुहाग का रखवार,
पति की लंबी उम्र को, माँगा आज उपहार।

चंद्रमा की रौशनी में, छलकता आंखों में प्यार,
भक्ति, प्रेम और त्याग का, देखो अनुपम आकार।
काँपते अधरों पर दुआ, आँखों में विश्वास,
पति की दीर्घ आयु को, मन में पूर्ण विश्वास।

शिव-पार्वती का पूजन, दीपों का प्रकाश,
भक्ति में डूबी हर सजनी, करती प्रेम प्रकाश।
गीतों की गूंज है हर मन में उमंग हज़ार,
शिव-पार्वती का आशीष, करे सबका उद्धार।

- पल्लवी द्विवेदी
एक महीने पहले
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