आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शोभाग्य पर्व तीज

                
                                                         
                            हरियाली की छाया में, आई तीज की रात,
                                                                 
                            
सज-धज कर आईं बहनें, लहराया सौगात।
मेंहदी रचे हाथों में, सजी चूड़ियों की बात,
झूलों पर झूलती नारी, हर दिल है कायनात।

हरियाली लहराए, झूले पड़ें पेड़ों पर,
सावन की फुहारों संग, तीज आई घर-घर।
व्रत रखा है श्रद्धा से, सुहाग का रखवार,
पति की लंबी उम्र को, माँगा आज उपहार।

चंद्रमा की रौशनी में, छलकता आंखों में प्यार,
भक्ति, प्रेम और त्याग का, देखो अनुपम आकार।
काँपते अधरों पर दुआ, आँखों में विश्वास,
पति की दीर्घ आयु को, मन में पूर्ण विश्वास।

शिव-पार्वती का पूजन, दीपों का प्रकाश,
भक्ति में डूबी हर सजनी, करती प्रेम प्रकाश।
गीतों की गूंज है हर मन में उमंग हज़ार,
शिव-पार्वती का आशीष, करे सबका उद्धार।

- पल्लवी द्विवेदी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर