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दुविधा में मन या मन ही दुविधा है।

Palak Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अंजानी सी उलझन की कैसी यह विधा है,
        
                                                    
                            
दुविधा में मन या मन ही दुविधा है,
खुशी के रंगों में सांझ है और रंगों सा ही सवेरा है,
फिर मेरे भीतर पसरा कैसा यह अंधेरा है,
हँसी की छाँव में निहाँ अंतर्द्वंद्व यह गहरा है...
दुविधा में मन है या मन ही दुविधा है।
एक महीने पहले
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