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'हाल '

Palak

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिंदगी के अल्फ़ाज़ क्यों खो रहे हैं ,
        
                                                    
                            
हमने तो जीना चाहा था ,फिर भी
क्यों रो रहे हैं।

हाल कैसे ओर किससे बयां करें इस
दिल का,
कम्बख्त इस दिल को ही , अपनी
जिंदगी का हाल पता नहीं है ।

अब तो खामोशी ही सब कुछ बयां
करती है ,
जुबां चुप है ,पर आंखें हर दास्तां
कहती हैं।।


 
3 महीने पहले
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