जिंदगी के अल्फ़ाज़ क्यों खो रहे हैं ,
हमने तो जीना चाहा था ,फिर भी
क्यों रो रहे हैं।
हाल कैसे ओर किससे बयां करें इस
दिल का,
कम्बख्त इस दिल को ही , अपनी
जिंदगी का हाल पता नहीं है ।
अब तो खामोशी ही सब कुछ बयां
करती है ,
जुबां चुप है ,पर आंखें हर दास्तां
कहती हैं।।
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