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तन्हा मेरा सफ़र

Padmini Abrol

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच कहूँ तो इन दिनों बड़ी मुश्किलों में हूँ।
        
                                                    
                            
राहें खोई खोई सी है और बीच सफर में हूँ।
सिर पर है कड़ी धूप और, राह पत्थरों की है,
कदम रख दिए अकेले, अभी राहगुजर में हूँ |
गहरे हैं अँधेरे अभी और मंजिल का पता नहीं,
संग नहीं साथ कोई, न किसी की नज़र में हूँ |
कैसे कटेगी उम्र बड़ी, मुश्किल सवालात है
कैसे कहूँ कि अब भी उसी ख्वाबों”असर में हूँ |
गुम रहती हूँ हररोज किसी ख़्वाबों ख्याल में न
चाहते हुए भी खैरख्वाह की खबर में हूँ |
3 घंटे पहले
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