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सावन का संदेश

P R Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यह बादलों से भरा आकाश
        
                                                    
                            
यह बिजली की चमचम
रिमझिम बूंदो की फुहार
मन मयूर यूं नाच उठा
जब से आई बरखा बहार

यह मिट्टी की सोंधी खुशबू
यह धरती पर छाई हरियाली
झूम उठी डाली डाली
सब ओर छाई खुशहाली
कहीं खुशी का संदेश
कहीं छपपर से पानी रिसता
गृहस्ती भीगने का अंदेशा
तो कहीं खुशी का संदेशा
खेती लहलाहाती देख
किसान के चेहरे पर रौनक आई
कुमहार का अलाव ठंडी हवा से मध्यम हुआ
कैसे सूखें दिया खिलौने घड़ा सुराही
माथे पर चिंता की लकीर छाई

उमेश भरी गर्मी पसीने से तरबतर करती
फिर सावन की ठंडी फुहार
मन में उमंग भर लाई
नीले आकाश में सतरंगी धनुष
मन में भर दे नया प्रकाश
हर तरफ प्रकृति की सुंदरता
मन मोह लेती यह अनुपम छटा
पंछी भी मगन होकर चहकने लगता
कहीं कोयल की कू कू, तो कहीं
मोर की पीहू पीहू गूंज उठती

बारिश की हर बूंद के संग
मन में छा जाती नई उमंग
बरसात का यह समा
हर दिल में भर देता उत्साह
2 महीने पहले
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