यह बादलों से भरा आकाश
यह बिजली की चमचम
रिमझिम बूंदो की फुहार
मन मयूर यूं नाच उठा
जब से आई बरखा बहार
यह मिट्टी की सोंधी खुशबू
यह धरती पर छाई हरियाली
झूम उठी डाली डाली
सब ओर छाई खुशहाली
कहीं खुशी का संदेश
कहीं छपपर से पानी रिसता
गृहस्ती भीगने का अंदेशा
तो कहीं खुशी का संदेशा
खेती लहलाहाती देख
किसान के चेहरे पर रौनक आई
कुमहार का अलाव ठंडी हवा से मध्यम हुआ
कैसे सूखें दिया खिलौने घड़ा सुराही
माथे पर चिंता की लकीर छाई
उमेश भरी गर्मी पसीने से तरबतर करती
फिर सावन की ठंडी फुहार
मन में उमंग भर लाई
नीले आकाश में सतरंगी धनुष
मन में भर दे नया प्रकाश
हर तरफ प्रकृति की सुंदरता
मन मोह लेती यह अनुपम छटा
पंछी भी मगन होकर चहकने लगता
कहीं कोयल की कू कू, तो कहीं
मोर की पीहू पीहू गूंज उठती
बारिश की हर बूंद के संग
मन में छा जाती नई उमंग
बरसात का यह समा
हर दिल में भर देता उत्साह
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