क्या आपने भगवान को देखा है
यह प्रश्न सबको चौंका देता है
कुछ हाँ कहते कुछ ना कहते
पर वास्तव में सोचने पर
मजबूर हो जाते कि भगवान है कहाँ
भगवान तो हर जगह हैं
चाहे जीव हो या निर्जीव
जड़ हो या चेतन
पहाड़ हो या पाषाण
या प्रकृति की अद्भुत रचना हो
उसे महसूस किया जा सकता
ज्यों पत्तों की सरसराहट से हवा को
सूरज के तेज प्रकाश से गर्मी को
बादलों की गड़गड़ाहट से ध्वनि को
वह हर जगह हर वास्तु में है
वह चन्दा की शीतलता में
तारों की टिमटिमाहट में
चिड़ियों की चहचहाहट में
बच्चों के अधरों पर मुस्कान में
वह हर ह्रदय की धड़कन में
वह नदी समुद्र की लहरों में
वह हर जीव के अन्तः करण में है
उसे देखने के लिए
आँखों की ज़रूरत नहीं
उसे महसूस करने के लिए
निर्मल ह्रदय पर्याप्त है
वह हर एक के ह्रदय में विद्यमान है
बस मन की आँखों से देखो
वहीँ वह विराजमान है