विज्ञापन

छात्र शिक्षक संवाद

P R Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बरसों बाद एक वृद्ध शिक्षक की
        
                                                    
                            
हो गई छात्र से भेंट
दोनों एक दूसरे को देख
रह गए आंखें टेक

शिक्षक तो वही का वही रहा
बस बाल पक गए और आंख पर चश्मा चढ़ गया
छात्र पास के एक भट्टे पर मजदूरी कर रहा था
धूप तेज थी पीठ पर बोझ
माथे पर पसीना टपक रहा था
गुरु जी को देख छात्र ठिठक गया

प्रणाम गुरुजी पहचाना आपने
हां हां चश्मा ठीक करते हुए
शिक्षक बोला ओह तुम दयाल
कितने वर्षों बाद, क्या कर रहे हो

दयाल मुस्कुराते हुए
गुरुजी बस ईंट पत्थरों की पढ़ाई कर रहा हूं
तुम तो बहुत होशियार थे, गणित में सबसे अव्वल
तुम्हे तो अधिकारी बनना चाहिए था
दयाल चुप रहा, कहने लगा घर जा कर पत्र में लिखूंगा सब

अगले दिन गुरुजी के घर पत्र आया
गुरुजी आपने कहा था मैं अधिकारी बनूँगा
पर गुरुजी आपकी मेहनत और मेरा ज्ञान सब दूर होता गया
जब आप पढ़ाई में कम दूसरे कामों में ज्यादा व्यस्त हो गए
कभी मतदाता सूची, कभी जनगणना, और कभी चुनाव ड्यूटी, कभी सर्वे कभी किसी योजना के फॉर्म कभी पोर्टल में व्यस्त रहे

हम गरीब बच्चों के सपने अधूरे ही रह गए
इसमें आपका कोई दोष नहीं है गुरुजी
पत्र पढ़कर गुरु और शिष्य दोनों की आंखों में आंसू आ गए
इसलिए कि छात्र अधिकारी नहीं बन सका
और इसलिए कि शिक्षक उसे काबिल नहीं बना सका
जब शिक्षक को शिक्षक नहीं रहने देते
तो केवल शिक्षक ही पराजित नहीं होता
बल्कि पूरी पीढ़ी ही हार जाती है
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all