विज्ञापन

ओ हिंद की हिंदी

Omprakash Bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ओ हिंद की हिंदी
        
                                                    
                            
तुझे जन-जन के मन पर छा जाना है
बस-जा जन जन के आंगन में 
जन-जन ने तुझे पहचाना है
जन-जन को गले लगाना है 
तुझमें संस्कृत, तुझमें है द्रविड़
तू भाषाओं की संगम है
तू है निर्मल तु कोमल है 
तेरी तो सरलता स्वर्णिम है
सीधी सादी जैसे खादी,
तु ही तो मेरी गांधी है
बहती गंगा की धारा है,
हर मस्जिद की मीनारा है,
हर इक तेरा परवाना है

दक्षिण में छा जा उत्तर की तरह
हर डाल डाल हर पात पात
हर कायनात घुंगरू कि तरह
दक्षिण में छा जा उत्तर की तरह
कहता दक्षिण का वासी हैं
हर द्वार खुला आजा छाजा 
जनता तो तेरी प्यासी है
जहां में सब को गले लगाना है 

हां सही समय है छाने का
डोरी पर ढील नहीं देना
कोई आये प्रतिरोध करें
केवल अपना प्यार उसे देना
हर एक ह्रदय समता देना
हर दिल की धड़कन बनना
हर एक तेरा दिवाना है
भारत मां का दिवाना है
मां भारती का दिवाना है 
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile