मोहब्बत के नाम पर क्या क्या नहीं हुआ
नाम लें तो छेड़खानी, ना ले तो क्यों नहीं छुआ।
साबरमती चलो , प्यार का जहाॅं (दुनिया )
जहां चरखी है गांधी की, चरखा भी गांधी का।
अहिंसा के पुजारी का, कद और बढ़ गया
वह पैदल हां जब चला ।
साबरमती चलो
गांधी के बदन पर कुछ भी तो नहीं है
और हकीकत यूं बयां है
चरखी ने गांधी को, गांधी ने चरखी को
हर बार है छुआ , बार बार है छुआ
ललाट को सजा, फहराई गई ध्वजा
राम राज्य की सजाई गई दुआ ।