कृष्ण तुम इतना बताना,
बांवरी राधा ही क्यूं है
रास मे छमके पैंजनिया
राधावर लगते हो प्यारे
बांवरे लगते हो न्यारे।।
कृष्ण तुम इतना बताना
तान बंसी की सुनाकर तुमने ही न्योता दिया था
प्रण हां एकाकार का भी श्याम तुमने ही किया था
आधी राधा कृष्ण आधा , कृष्ण आधा आधी राधा
भूलकर राधे से वादा,क्यूं थामा कुरुक्षेत्र में रथ
क्यूं भुलाया रास प्रांगण, क्यूं रचाया महाभारत ।।
कृष्ण जो पुर्णत्व तुमने राधिका से पाया था
वही पग पग कुरुक्षेत्र में तुम्हारे काम आया था ।
महायोद्धाओं से परीपुर्ण
कुरुक्षेत्र का विशाल रण तुम्हारे सन्मुख था
मगर एक मन तुम्हारा , रास प्रांगण में उन्मुख था
भीष्म द्रोण कर्ण से योद्धा सन्मुख पाकर
तुमने महारास की कल्पना की है
रणक्षेत्र की असंख्य खनकती तलवारों में
तुमने दांडिया रास देखा है
शस्त्रों की गुंजती लय में , हर टंकार में
गरबी का चरमोत्कर्ष देखा है
इस कुरुक्षेत्र का यह, एक अद्भुत झरोखा है ।।
कृष्ण तुम इतना बताना
सच यह भी है
इन सब के बीच सारथी बन,
शांत निश्चिंत निर्विकार , तुम
पार्थ का रथ हांक रहे थे
और , रणस्थली के सारे घाव
राधा के हृदय स्थल से ,तुम्हें झांक रहे थे ।।
आओ द्वारिका के नाथ
बांसुरी धर हाथ
मुग्ध करते, सोलह कला युक्त ,कलाधारी को
कृष्ण को आह्वान है ,
आओ बन सारथी
अपलक बाट निहार रही
कल्याणी मां भारती।। भवानी मां भारती।।
ओम बजाज
- 9321111910