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हर लहर होगी चुरचुर

Omprakash Bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अवसर मिला है रिश्ते संभालने का
        
                                                    
                            
गांव खेत खलिहान अपनों से जुड़ने का
अंतरंग अनकही अनसुनी बतीयाने का
मन को अपने आप को टटोलने का।
कश्मीर से कन्याकुमारी, केवल एक प्रण है
देश ही मन है- देश ही तन है।
कोविड एक छल है,
कृष्ण का सुदर्शन
भारत की चेतना बन ,
देख रहा पल पल है।
कोविड का को कोरोना
दुष्ट पड़ोसी का अहंकार है,
इसे नष्ट करने अधीर है सभी
इस को वि ड , मे है, विध्वंस और डमरू भी,
इसका उद्गम स्थल,
शिव के तिसरे नेत्र के जद मे ,
हिमाला के शिखर से नहीं दुर ,
दुसरी,तिसरी हर लहर होंगी चुरचुर ।
शिव के तांडव में इसका विध्वंस
यह नष्ट होकर त्राहिमाम- त्राहिमाम कहता भागेगा
शिव डमरू बजाते इसे त्रिशूल की नोक पर रख नाचेंगे ।
हम नतमस्तक हो
वसुधैव कुटुम्बकम - वरदान मांगेंगे।

- ओम बजाज 
3 वर्ष पहले
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