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गीत - उलझनो के बगैर

Omprakash Bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हो सजदा मेरा ये अदा
        
                                                    
                            
उलझनो के बगैर ।।
करूं मैं सिजदा हो नेमत तेरी
हां हो नेमत तेरी
तुझसे हो जाय बस एक नजर
//उलझनो के बगैर//
इस वजु पे हो तेरा करम
हां हो तेरा करम
सारे मिट जाय मन के भरम
//उलझनो के बगैर//
हो दीदार बस एक लम्हा
हां बस एक लम्हा
चाहे सांसों की , डोर छोड़ दें
//उलझनो के बगैर//
छा गई प्यारी मदहोशीयां
हां प्यारी मदहोशीयां
प्रीत ने प्रीत को जी लिया
//उलझनो के बगैर//
चाह है शब्द मिलते रहे
हां शब्द मिलते रहे
चाह है गीत ढलते रहे
//उलझनो के बगैर//
गीत पर हां मेरे साथ दो
हां मेरे साथ दो
तालीयों से हां जज़्बात दो
//उलझनो के बगैर//
मीत मन का मुझे मिल गया
हां मुझे मिल गया
हर डगर रोशनी का दिया 
//उलझनो के बगैर//
3 वर्ष पहले
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