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ग़ज़ल:ग़ज़ल कहता रह गया।

Om Gopal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शायरों ने की शायरी रानाई-ए-कौनैन पर,
        
                                                    
                            
नादान मैं तुझ पर ही ग़ज़ल कहता रह गया।

ज़िंदगी दौड़ती रही ज़माने के साथ-साथ,
एक मेरा दिल था जो तेरी राहों में बह गया।

तूने सजाई महफ़िलें हमेशा गैरों के साथ,
मैं शम्अ-ए-आरजू ही रोशन करता रह गया।

दुनिया बदल गई मगर बदला न मेरा दिल,
तेरी यादों का साया ही मेरे दिल में रह गया।

वक़्त के साथ जो चले मंज़िल मिली उन्हें,
तूने छोड़ा था जहां'ओम'मैं वहां ही रह गया।
रानाई ए कौनैन : पूरी कायनात की सुंदरता।
-ओम गोपाल शर्मा 
एक महीने पहले
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