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मेरी माँ की पुरानी साड़ी

nutan Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी माँ की पुरानी साड़ी
        
                                                    
                            

मेरी माँ की पुरानी साड़ी,
लगती है मुझको प्यारी,
बताती है मुझको हर पल,
अपनी ये कहानी सारी।

मेरी माँ की पुरानी साड़ी।

लिपटती हूँ जब भी इससे,
सुनाती है मुझे लोरी,
दिखाती है मुझे बचपन,
के पल वो न्यारी-न्यारी।

मेरी माँ की पुरानी साड़ी।

सहेज रखी हूँ इसे दिल से,
छुपाकर सबसे सारी,
दिलाती है मुझे दिलासा,
जब भी मन हो भारी।

मेरी माँ की पुरानी साड़ी।

दिखाती थी मुझे नखरे,
दिलाती थी नए कपड़े,
कहती थी उनसे जब भी,
ले लो तुम भी नई साड़ी।

मेरी माँ की पुरानी साड़ी,
लगती है मुझको प्यारी।
— नूतन झा
एक महीने पहले
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