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इस्लाम

Nizam Fatehpuri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस्लाम देवबंदी बरेली शिया नहीं।
        
                                                    
                            
क़ुरआन में लिखा है कि मोमिन बुरा नहीं।।

सबका ख़ुदा तो एक है फ़िरक़े अनेक क्यों।
सोचो ज़रा सा अक़्ल से फिर लड़ मना नहीं।।

इंसानियत से बढ़के है मज़हब नहीं कोई।
इंसान बनना सीखो बुरे में मज़ा नहीं।।

शैतान का है काम वो नफ़रत सिखाएगा।
नेकी है प्यार बांटना कोई ख़ता नहीं।।

पैग़ामे मुस्तफ़ा है कि मिलकर रहो सदा।
आपस में लड़के होगा किसी का भला नहीं।।

झूठी है आन-बान ये झूठी है ज़िंदगी।
बस मौत सच है मौत से कोई बचा नहीं।।

कुछ लोग कह रहे जो बटेगा कटेगा वो
तू फिर भी सो रहा है अभी तक जगा नहीं।।

इंसानियत तो मर चुकी नफ़रत की भीड़ में।
जो एक है वो सेफ है बिखरा हुआ नहीं।।

किसको ग़लत कहें यहाॅं किसको सही निज़ाम।
पढ़ लिख के बट गए सभी अनपढ़ बटा नहीं।।
-निज़ाम फतेहपुरी
 
एक वर्ष पहले
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