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वह बरगद का पेड़

Nivedita Srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खिड़की के उस पार दिखता है वह बरगद का पेड़
        
                                                    
                            
तन है जिसका भारी-भरकम जैसे कोई हृष्ट-पुष्ट शरीर
शाखाएँ उसकी मानो फैली हुई बाँहें अनेक
कह रहीं हों राही को, आओ लूँ तुम्हें अपनी छाँव में समेट
खिड़की के उस पार है वह बरगद का पेड़

भोर-सवेरे रोज़ बैठती उसपर कोयल काली
मधुर स्वरों में मानो कूकती, उठ जा ओ घर वाली
मैं खिड़की से झांक झॉंक उसे देखने का करती प्रयास
डाल डाल वह फुदकती मानो कर रही हो उपहास
खिड़की के उस पार है वह बरगद का पेड़

कड़क धूप में जब राही कोई बेहद थक जाता
बैठ दो घड़ी बरगद के नीचे, वह थोड़ा सुस्ताता
तब वह बरगद अपनी छाया बरसाता कुछ ऐसे
मानो थके हुए बच्चे को मॉं ने सुलाया आँचल में जैसे
खिड़की के उस पार है वह बरगद का पेड़

बरगद के उस पेड़ को किया बरसों निहार
हो गया है उससे मुझे बेहद प्यार
डरती हूँ कभी-कभी सोच- सोच ये बात
ख़ुदगर्ज़ मनुष्य के हाथों कट, हो न जाए बरगद का नाश
खिड़की के उस पार है वह बरगद का पेड़!!!!

-निवेदिता श्रीवास्तव
3 वर्ष पहले
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